शनिवार, 2 अक्तूबर 2010

शहद क्या है ये जाने आज ? What is Honey ?

शहद क्या है ये जाने आज ? What is Honey ?
आज  कल आयातित  शहद बहुत चर्चा मे है तो आज शहद के बारे मे ही जाना जाए कि क्या होता है शहद ?honey bee -0
आज से हजारों वर्ष पहले  से ही दुनिया  के सभी  चिकित्सा शास्त्रों ,धर्मशास्त्रों, वैधों-हकीमों, ने शहद की उपयोगिता व महत्व को बताया है। आयुर्वेद के ऋषियों  ने भी माना है कि तुलसी व मधुमय पंचामृत का सेवन करने से संक्रमण  नहीं होता और इसका विधिवत ढंग से सेवन कर अनेक रोगों पर विजय पाई जा सकती है।
 शहद को शहद की मक्खियां Honey Bee  बनाती है इनका जो घर होता है उस को छत्ता कहते है इन छत्तों मे मधुमक्खियाँ रहती है
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मधुमक्खियों के जीवन की 4अवस्थाये  अंडा ,लार्वा , प्यूपा ,वयस्क मक्खी  होती है |ये मधुमक्खियाँ निम्न  प्रकार की होती है |1.श्रमिक 2.नर 3.रानी
मधु या शहद एक मीठा, चिपचिपाहट वाला अर्ध तरल पदार्थ होता है जो मधुमक्खियों द्वारा पौधों के पुष्पों में उपस्थित  मकरन्द के कोशों से निकलने वाले  मकरंद जिसे नेक्टर नाम का रस भी कहते है  से तैयार किया जाता है और आहार के रूप में छत्ते की कोठियों मे संग्रह किया जाता है। शहद मैं जो मीठापन होता है वो मुख्यतः ग्लूकोज़ और  फ्रक्टोज शुगर के कारण होता है। शहद का प्रयोग औषधि रूप में भी होता है। शहद में ग्लूकोज व अन्य शर्कराएं तथा विटामिन, खनिज और अमीनो अम्ल भी होता है जिससे कई पौष्टिक तत्व मिलते हैं जो घाव को ठीक करने और उतकों के बढ़ने के उपचार में मदद करते हैं। प्राचीन काल से ही शहद को एक जीवाणु-रोधी के रूप में जाना जाता रहा है। शहद एक हाइपरस्मॉटिक एजेंट होता है जो घाव से तरल पदार्थ निकाल देता है और शीघ्र उसकी भरपाई भी करता है और उस जगह हानिकारक जीवाणु भी मर जाते हैं। जब इसको सीधे घाव में लगाया जाता है तो यह सीलैंट की तरह कार्य करता है और ऐसे में घाव संक्रमण से बचा रहता है।
मधुमक्खी के पेट मे एक थैलीनुमा संरचना होती है जो एक वाल्व से जुडी होती है मधुमक्खी फूलों से मकरंद चुस्ती है और इस थैली मे एकत्र करती रहती है और छत्ते मे आकर इस रस को वाल्व के दवारा मधुकोशों मे उगल देती है और मकरंद मे जो पानी होता है वो वाष्पीकरण के द्वारा उड़ जाता है और बाकी पदार्थ रासायनिक क्रिया के फलस्वरूप शहद मे बदल जाता है |
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शहद इकठ्ठा करने के लिए मधुमक्खियों को बहुत ही परिश्रम करना पड़ता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मधुमक्खियां अपने छत्ते के सभी खानों को महीनों में भर पाती हैं, लेकिन मनुष्‍य है कि देखते-देखते उनके परिश्रम को नष्‍ट करके अपना भला कर लेता है। सचमुच इस क्षेत्र में मनुष्‍य बड़ा ही स्वार्थी व लोभी है।मधुमक्खी के फूलों पर बैठने से परागण जैसी महत्वपूर्ण क्रिया सम्पन्न हो जाती है और मधुमक्खियों को बदले मे मिला मीठा रस जो की वो अपने और अपने बच्चों के लिए सुरक्षित रखती है को ही मनुष्य और अन्य जीव  खाते है शहद मे बहुत से पोषक तत्व होते है जैसे 
फर्कटोज़ ३८.२%, ग्लूकोज़: ३१.३%,सकरोज़: १.३%,माल्टोज़: ७.१%,जल: १७.२%,उच्च शर्कराएं: १.५%,भस्म: ०.२%,अन्य : ३.२%
वास्तव  मे शहद मधुमक्खियों के बच्चों और उन का भविष्य का संचित आहार है मनुष्य व जानवरों बंदर और भालू आदि ने शहद को अपने आहार मे शामिल कर लिया है इसे पंजाबी भाषा मे माख्यों भी कहा जाता है यह शहद यदि सूक्ष्मदर्शीय अध्ययन से गुज़ारे तो हमे इस के अंदर परागकण भी दीखते है शहद के लिए यदि मधुमक्खियाँ गन्ने के रस पर बैठे तो रस से बना शहद सर्दियों मे जम जाता है उस मे शूगर की मात्रा ज्यादा होगी |मधु एक ऊष्मा व ऊर्जा दायक आहार है तथा दूध के साथ मिलाकर यह सम्पूर्ण आहार बन जाता है। इसमें मुख्यतः अवकारक शर्कराएं, कुछ प्रोटीन, विटामिन तथा लवण उपस्थित होते हैं। शहद सभी आयु के लोगों के लिए श्रेष्ठ आहार माना जाता है और रक्त में हीमोग्लोबिन निर्माण में सहायक होता है।एक किलोग्राम शहद से लगभग ५५०० कैलोरी ऊर्जा मिलती है। एक किलोग्राम शहद से प्राप्त ऊर्जा के तुल्य दूसरे प्रकार के खाद्य पदार्थो में ६५ अण्डों, १३ कि.ग्रा. दूध, ८ कि.ग्रा. प्लम, १९ कि.ग्रा. हरे मटर, १३ कि.ग्रा. सेब व २० कि.ग्रा. गाजर के बराबर हो सकता है।
आजकल चीन से आयातित शहद और मुनाफा कमाने मे अंधी कम्पनीयों के एक घपले को उजागर किया गया है जिसमे सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (C.S.E.)  के शोध के अनुसार बाजार में बिक रहे बड़ी-बड़ी कम्पनीयों के शहद में प्रतीजैवीक एंटी-बायोटिक्स  की मात्रा अंतर्राष्ट्रीय मानकों से दोगुना तक मिली है। ऐसे शहद को अगर लगातार  खाया जाता है तो हमारे शरीर के एंटी बायटिक के प्रति रजीस्ट बनने का खतरा हो जाएगा। और बिना जरूरत के इन प्रतीजैवीक पदार्थों के शरीर मे जाने से जो  साइड इफेक्ट्स होंगे वो भी खतरनाक होंगे | इनके दवारा जांचे गए शहद में एजिथ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लॉक्सेसिन और  ऑक्सीटेट्रासाइक्लिन, क्लोरैंमफेनिकल, एंफीसिलीन आदि प्रतिजैविक पदार्थ पाए गए| यह प्रतीजैवीक शहद मे आते कहाँ से है जब मधु पालन के छत्तों मे इनको बीमारी से बचने के लिए इन प्रतिजैविक  का प्रयोग कियाजाता है तब ये शहद मे आते है ठीक उसी प्रकार जैसे गाय भैंस को बीमार होने पर प्रतिजैविक  का  कोर्स दिया जाता है तो उनके दूध मे भी प्रतिजैविक  का असर आ जाता है इस दूध को पीने  वाले के शरीर मे अनायास ही ये एंटीबायोटिक चले जाते है और हानि करते है |

आज  श्री प्रकाश गोविन्द जी ने शहद के बारे मे निम्न लिखित प्रश्न पूछे यदि कोई सुधिजन इनका जवाब देना चाहे तो कमेन्ट कर दे उत्तर प्रश्न के साथ प्रकाशित कर दिया जाएगा ताकि और लोगो जी का भी ज्ञान बढ़ सके | 
मैंने जब शहद के बारे में आपकी पोस्ट देखी तो बालसुलभ कई जिज्ञाशाएं थीं ...जैसे :
१-  जो लोग शहद के लिए मधुमक्खी पालन का व्यवसाय करते हैं उन्हें मधुमक्खी क्यों नहीं काटती ?

Ankit.....................the real scholar ने कहा…  
जो लोग मधुमक्खी पालन का व्यवसाय करते हैं 
वह  शहद निकलते हुए विशेष कपडे पहनते हैं 
जिसके कारण मधुमक्खी उनको काट नहीं पाती हैं
इसी  समय में शायद पालनकर्ता उनके स्वभाव  को जनता है
तथा कोई ऐसा काम ही नहीं करता है
की मधुमक्खी को काटने की जरूरत पड़े |
२- रानी मधुमक्खी क्या होती है ? क्या लोगों का कहना सही है कि अगर रानी मधुमक्खी को पकड़ लो तो कोई मधुमक्खी नहीं काटेगी ?

उत्तर : रानी मधुमक्खी आकार मे सबसे बड़ी होती है एक छत्ते मे एक ही या ज्यादा होती है ये अंडे देती है जिन अण्डों को नर निषेचित करते है यदि रानी मधुमक्खी को पकड़ ले तो शाही सैनिक और श्रमिक मक्खियाँ आक्रमण कर देंगी परन्तु  छत्ते मे रानी मधुमक्खी को ढूँढना आसान काम नहीं है|  



३- शुद्ध शहद कैसा होता है ?  शुद्ध शहद की पहचान कैसे कर सकते हैं ?
उत्तर : शुद्ध शहद को जब धार बना कर छोड़ा जाता है तो वह सांप की तरह कुंडली बना कर गिरता है जबकि नकली फ़ैल जाता है  | 
and 
Add a tablespoon of honey into the water. If the honey is impure, it will dissolve in the water at top layer - the most common additive to honey is syrup of jaggery, which dissolves.
If it is pure, the honey will stick together and sink as a solid lump to the bottom of the glass.
  

 
४- मधुमक्खी के एक छत्ते में कितना शहद निकलता है  और पूरा भरा हुआ छत्ता कितने दिन में बन जाता है ?

उत्तर: प्राकृतिक छत्ते का तो पता नही,लेकिन मैंने एक मधुमक्खी पालक से पूछा तो उस ने बताया की यह दो बातों पर निर्भर करता है 
1.फूलों की उपलब्धता पर,वर्ष के सभी महीनों मे फूलों की उपलब्धता एक समान नहीं होती है|
2.मौसम  की अनुकूलिता पर,अनुकूल मौसम यानी उस स्थान का जहां  मधुमक्खी पाली गयी है |
वैसे उस ने बताया की यहाँ जहां उस ने पाली है वहाँ वह  साल मे ३-३ महीनों मे दो बार यील्ड लेता है |   
५- क्या आँखों के लिए शहद बेहद लाभदायक होता है ? ...रामदेव जी तो यही कहते हैं !

उत्तर : नहीं एलोपेथिक डाक्टर नहीं मानते मैंने पूछा है |
साभार : नवभारत टाइम्स,विकिपीडिया,गूगल इमेज
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12 टिप्‍पणियां:

anjana ने कहा…

बढ़िया ज्ञानवर्धन लेख.

आशीष मिश्रा ने कहा…

बहोत ही अच्छी व उपयोगी जानकारी....
आभार

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI ने कहा…

अच्छी जानकारी !!!

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

सुन्दर ज्ञानवर्धक जानकारी
आभार
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और भी बहुत कुछ जानना चाहता था शहद के बारे में ..इसलिए अधूरापन सा लगा !
सदभावनाओं के साथ

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

दर्शन जी, इस ब्लॉग के लिए जरिए आप सचमुच बड़ा काम कर रहे हैं।
................
.....ब्लॉग चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।

Ankit.....................the real scholar ने कहा…

इस जानकारी पोर्न लेख के लिए आपका धन्यवाद | मैं अपनी सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार इसमें पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देता हूँ

१ -जो लोग मधुमक्खी पालन का व्यवसाय करते हैं वि शहद निकलते हुए विशेष कपडे पहनते हैं जिसके कारन मधुमक्खी उनको काट नहीं पाती हैं एनी समय में शायद पालनकर्ता उनके स्वबहाव को जनता है तथा कोई ऐसा कम ही नहीं करता है की मधुमक्खी को काटने की जरूरत पड़े |

२ रानी मक्खी सच में रानी होती है|नर मक्खियाँ तो सम्भोग के बाद मर जाती हैं(या श्रमिक मखियों के द्वारा मार दी जाती हैं) तथा श्रमिक मक्खियाँ सारा श्रम का कार्य करती हैं |एक समूह में केवल १ रानी मक्खी होती है जो अंडे देती है | इसको इसके अतिरिक्त कोई भी और कार्य नहीं करना होता है| अब आप खुद ही समझिये की अगर आप रानी मक्खी को पकड़ लेंगे तो मय कोई और मक्खी आपको नहीं कटेगी ? हाँ बाकि सभी व्यवसाय की तरह इस व्यवसाय में भी चोरी होती है तथा इसमें चोरी करने के लिए चोर केवल रानी मक्खी को चुरा लेता है, बाकि की मक्खिय स्वयं ही उसके पीछे चली जाती हैं

३- इसका कोई प्रमाणिक उत्तर तो नहीं पता परन्तु हमारे बुन्देलखन में कुछ मान्यताओं के अनुसत कुत्ता शुद्ध शहद को नहीं खता है
४ - नहीं पता
५-शहद हमारे पूरे शरीर के लिए लाभदायक है और आँखें भी हमारे शरीर में आती हैं|

वैधानिक चेतावनी - १ उत्तर के दुसरे हिस्से तथा ३ उत्तर की प्रमाणिकता के बारे में मैं कोई दावा नहीं कर रहा हूँ |

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

उपयोगी जानकारियों से भरी पोस्ट के लिए बधाई!

ZEAL ने कहा…

Beautiful post. Very informative indeed. Thanks.

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

हाँ .. ये हुयी न बात
अब मेरी जिज्ञासा शांत हुयी
अंकित जी ने सभी प्रश्नों के संतुलित और पर्याप्त जवाब दिए ! मेरी सभी बातों का समाधान करने के लिए बहुत-बहुत आभार !

संग्रहणीय पोस्ट बन गयी अब !

Surendra Singh Bhamboo ने कहा…

नमस्कार भाइ दर्शन लाल बवेजा जी पहली बार आपके ब्लॉग पर आया यहाँ पढ़ने को बहुत ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त हुई वास्तव में आप सच्ची हिन्दी सेवा और देश सेवा कर रहें है। आप बधाइ के पात्र हे। समय के अभाव में कुछ ही लेख पएत्र पाया लेकिन जिने पएत्रे वो सभी गागर में सागर भरने वाले लगे पुनः आपको बहुत बहुत बधाई साथ ही आपको व आपके ब्लॉग पाठको तथा आपके परिवार वालों को मां दुर्गा का आशीर्वाद हमेशा मिलता रहें नवरात्र की शुभकामनाएं

हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

मालीगांव
साया
लक्ष्य

शरद कोकास ने कहा…

आजकल तो समझ मे नही आ रहा शहद खाये या न खाये

Umesh Partap Vats ने कहा…

दर्शन जी आपने शहद के खूब दर्शन कराएं। शहद घी के साथ बराबर मात्रा मे जहर क्यों बन जाता है। कृपया बताने का कष्ट करे।