बुधवार, 29 सितंबर 2010

हमारे बाल सफेद क्यूँ हो जाते है ? Why Hair Become White ?

हमारे बाल सफेद क्यूँ हो जाते है ? Why  Hair  Become White ?

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हालांकि बालों का सफेद होना मनुष्यों  के अनुभवी होने का प्रतीक माना जाता है, लेकिन अधुनिक समय में मनुष्य  इसे बिल्कुल भी पसंद नहीं करते।

हमारे बालों का रंग काला मेलानिन पिगमेंट Melanin Pigment के कारण होता है यह पिगमेंट चमड़ी के अंदर जहाँ बाल का अंदरूनी भाग होता है जिसे बाल कूप या पुटक (follicle) कहते हैं मे होता है | मेलानिन पिगमेंट वर्णक के कारण बालों मे रंग होता है

वर्णकों के कारण बाल काला, भूरा, या लाल हो सकता है। यह वर्णक वल्कुट की कोशिकाओं में निक्षिप्त होता है। बाल क्यों सफेद हो जाता है, इसका सही कारण ज्ञात नहीं है। यह संभव है कि उम्र के बढ़ने, रुग्णता, चिंता, शोक, आघात, और कुछ विटामिनों की कमी से ऐसा होता हो। डाक्टरों का मत है बाल का सफेद होना वंशागत होता है।

 

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बालों रंग काला मेलानिन के कारण होता  हैं, जो हमारी त्वचा के पिगमेंट में होता है। जिनके बालों का रंग हल्का काला  होता है उनमें मेलानिन की कमी होती है। आप देखते हो न कि बड़े लोगों के बाल सफेद या ग्रे हो जाते हैं, असल में उनमें मेलानिन पिगमेंट खत्म हो जाता है, इसलिए उनके बाल सफेद हो जाते हैं। बालों का रंग अक्सर त्वचा के रंग पर निर्भर करता है। अगर आपका रंग फेयर है तो बालों का रंग सुनहरा होगा और अगर आप सांवले हैं तो बालों का रंग काला होगा। ज्यादातर देखा जाता है कि बच्चों के बालों का रंग उनके माता-पिता से विरासत में मिलता है।

परन्तु बहुत से चिकित्सकों का मानना है कि बालों की सफेदी वैसे तो जैनेटिक यानी अनुवांशिक होती है। किंतु फिर भी कुछ ऐसे कारण है जो समय से पहले बालों को सफेद बनाने में अहम भूमिका अदा करते है। इनमें न केवल दवा बल्कि अनीमिया, थाइराइड व एचआइवी-एड्स भी शामिल है। खाने में प्रोटीन व आयरन की कमी भी बालों की सफेदी का एक कारण है।

एक अन्य तरीके से भी समझाया जा सकता है बालों का सफेद होना जीन पर निर्भर है। कई बार जीन का प्रभाव पूरा नहीं होता। इस कारण बाल या तो कम सफेद या सफेद होते ही नहीं। किंतु जब जीन का प्रभाव होता है तो बाल सफेद हो जाते है। दूसरा मुख्य कारण थाइराइड ग्लैड है। युवाओं के शरीर में इस ग्रंथी (ग्लैड) की स्राव कमी या अधिकता बालों को सफेद बना देती है। दवाएं भी बालों की सफेदी के कारणों में से एक है। एक रिपोर्ट के मुताबिक एंटी मलेरिया दवा के प्रयोग से बाल समय से पहले सफेद हो जाते है। खाने में प्रोटीन या आयरन की कमी व विटामिन बी-12 की कमी से भी बाल सफेद हो जाते है। यंग ऐज में जैनेटिक एग्जिमा के कारण तथा आजकल एचआईवी व एड्स पीड़ितों में भी यह समस्या देखी जा रही है। परनीसियस अनीमिया से ब्लड बनाने वाले सेल बिगाड़ने के कारण भी कम उम्र में बाल सफेद हो जाते है।

क्या कोई इलाज़ है कि बालों को सफेद होने से रोका जा सके !

बालों के असमय सफेद होने की समस्या से बचा सकता है। इसका उपचार है, बशर्ते समय पर सही इलाज लिया जाए। उन्होंने बताया कि सही डाइट इसका सबसे बेहतर उपचार है। इसके अलावा थाइराइड व ब्लड जांच करवाना भी इसके बचाव में शामिल है।चिंता , भय ,तनाव ,सोच ,प्रदूषण से बच कर रहना भी हल हो सकते है

हेयर डाई से भी बालों का रंग खोना यानि कि सफेद होना बढ़ जाता है |

चित्र गूगल इमेज से उठाये गए है साभार

मंगलवार, 28 सितंबर 2010

गर्म करने पर दूध उफनता है परन्तु पानी नहीं ? Why does Milk spill over when it Boils?

 गर्म करने पर दूध उफनता है परन्तु पानी नहीं ? Why does Milk spill over when it Boils?
जब दूध को गर्म किया जाता है तो वो उबलने पर उफन कर बाहर आ जाता है परन्तु पानी उफन कर बाहर नहीं आता है ऐसा क्यों होता है ?
इसको जानने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि दूध मे होता क्या क्या है ?
पानी के विपरीत, दूध एक सरल तरल नहीं है. यह एक कोलायडल  colloid है और इसमें  निलंबित रूप में कई पदार्थ होते हैं इन पदार्थों मुख्य रूप से प्रोटीन, शर्करा , वसा और विटामिनखनिज होते है 
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जब  दूध को गर्म किया जाता है तो प्रोटीन और वसा दूध से अलग हो जाते है हल्के होने के कारण प्रोटीन और वसा दूध की सतह पर एकत्र हो कर एक परत लेयर या फिल्म बनाते है 
दूध  में पानी एक बड़ी मात्रा में होता है गर्म करने के दौरान पानी भाप में परिवर्तित हो जाती है  पानी वाष्प मे बदल कर  ऊपर बढ़ जाता है  दूध के ऊपरी परत क्रीम  के नीचे यह भाप  फँस जाती  है और यदि अब भी हीटिंग जारी रखी  जाये तो भाप तेजी से ऊपर उठती है और बुलबुलों के रूप मे झाग बनाती है और दूध उफन कर बाहर आ जाता है |
तो फिर दूध को कैसे उबाले कि वो उफने नही ?
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दूध  के पतीले मे एक करछी लंबा चम्मच रख देने से मलाई की परत के नीचे वाष्प एकत्र नहीं होने देती और वाष्प को बहार निकलने का रास्ता मिल जाता है |                  दूसरा उपाय यह है की हम वसा प्रोटीन की परत बनने ही ना दे इसके लिए दूध  को धीरे धीरे हिलाते रहना चाहिये इस से मलाई की परत बनने ही नहीं पाएगी और हिलाते (चलाते) रहने से वाष्प भी निकलती रहेगी |
नोट :- सुझावों का स्वागत है सुझावों और लेख मे सुधारों को लेख मे शामिल कर लिया जाएगा |
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शनिवार, 25 सितंबर 2010

वन/पेड़ वर्षा कराने मे सहायक होते है How does trees help in raining?

वन/पेड़ वर्षा कराने मे सहायक होते है How does trees help in raining?
किताबों मे पड़ते है की पेड़ वर्षा करवाने मे सहायक होते है जहा वन होते है या पेड़ अधिक होते है वहाँ वर्षा भी अधिक होती है ! 
और अधिक से अधिक पेड़ लगाने को क्यों कहा जाता है बार बार 
पेड़  हमें आक्सीजन गैस देते है और साथ ही साथ मे पेड़ वर्षा करवाने मे सहायता भी करते है |
आओं  जाने कैसे ?

 पेड़  पौधे दो क्रियाएँ मुख्यतः करते है |
1.प्रकाश-संश्लेषण PHOTOSYNTHESIS-भोजन तैयार करना
2.वाष्पोत्सर्जन TRANSPIRATION-इस प्रक्रिया मे पौधे अपने मे संग्रहीत अतिरिक्त पानी की मात्रा को जल वाष्पों के रूप मे वायुमंडल मे छोड़ते रहते है |
पत्तों मे एक संरचना जिसको रंध्र Stomata कहते है रंध्र पत्तों में असंख्य होते है रंध्रो मे से पौधों का अतिरिक्त पानी जल वाष्पों के रूप मे वातावरण मे निकलता रहता है |  यह जल वाष्प  वायु मंडल मे ऊपर एकत्र हो कर और फिर संघनित Condense वर्षा  बनती है और बरसती है या फिर वायुमंडल को ठण्डा करती है और इस  ठन्डे वातावरण से गुजरते बादल वहीँ पर संघनित हो कर बरस जाते है |
अब समझे क्यों सब बच्चों को बार बार पेड़ लगाने के लिए कहते है ? 

वाष्पोत्सर्जन TRANSPIRATION को जरा और जान लो :-   पौधों द्वारा अनावश्यक जल को वाष्प के रूप में शरीर से बाहर निकालने की क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहा जाता है। पैड़-पौधे मिट्टी से जिस जल का अवशोषण करते हैं जड़े निरंतर पानी का अवशोषण करती रहती है (बाएं चित्र रंध्र के है } परन्तु   

उसके केवल थोड़े से अंश का ही पादप शरीर में उपयोग होता है। शेष अधिकांश जल पौधों द्वारा वाष्प के रूप में शरीर से बाहर निकाल जाता है। पौधों में होने वाली यह क्रिया वाष्पोत्सर्जन कहलाती है। वाष्पोत्सर्जन की दर को एक यन्त्र द्वारा मापा जा सकता है। इस यन्त्र को पोटोमीटर कहते हैं।
नोट :- सुझावों का स्वागत है सुझावों और लेख मे सुधारों को लेख मे शामिल कर लिया जाएगा | 
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शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

क्यों व कैसे चलती है हवायें ? Why Does The Wind Blow ?

क्यों व कैसे चलती है हवायें ? Why Does The Wind Blow ?
सबसे  पहले ये जान ले कि पवन Wind होती क्या है ?
बहती हुई हवा को पवन कहते है  अर्थात हवा और पवन (Air and Wind) मे अंतर होता है |
हम  अक्सर कहते है कि हवा चल रही है पर ये नहीं जानते है कि हवा क्यूँ चल रही है |

तो आओं जाने इस के लिए जिम्मेदार है 
पृथ्वी की असमान हीटिंग(It’s the uneven heating of the earth’s atmosphere)
सूर्य की गर्मी से पृथ्वी पर हवा गर्म हो जाती है गर्म हवा हल्की हो जाती है और गर्म हो कर फैलती है ऊपर उठ जाती है | 
हवा  के गर्म हो कर ऊपर उठने से उस स्थान पर एक रिक्ति उत्तपन होती है जिससे कम वायु दबाव का क्षेत्र बनता है |
अब  इस रिक्ति को पूर्ति करने के लिए ठण्डी हवा नजदीक से ही उच्च वायु दबाव के  क्षेत्र से आती है और हवा  चलने लगती है |
 उच्च और निम्न वायु दबाव मे जितना अधिक अंतर है तो हवा उतनी ही तेज़ी से चलेगी |  
हवा  किस दिशा मे चल रही है ये जानने के लिए निम्न का प्रयोग किया जाता है |
वात दिग्दर्शक 
या 
वात शंकु 
 और पवन की गति wind speed मापने के लिए 
का प्रयोग किया जाता है |

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सुझावों और लेख मे सुधारों को लेख मे शामिल कर लिया जाएगा | 
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बुधवार, 22 सितंबर 2010

कुत्ते जीभ बाहर निकाल कर क्यों हाँफते रहते है ? Why do dogs often keep out their tongue in summer?

कुत्ते जीभ बाहर  निकाल कर क्यों हाँफते रहते है ? का सीधा साधा और दो टूक जवाब तो ये कहा जा सकता है कि कुत्तों को पसीना अपेक्षाकृत अन्य स्तनपाईयों के कम आता है तो ऐसे  मे उसकी जीभ उसको शीतलता प्रदान करने महत्वपूर्ण कार्य करती है आओं जाने कैसे ?
कुत्ता एक स्तनधारी प्राणी है जो हमारी ही तरह गर्म खून का प्राणी है | पाचन क्रिया के दौरान स्तनधारियों के शरीर मे ऊष्मा पैदा होती है खासकर ग्रीष्म मौसम मे बहार का तापमान भी ज्यादा होने के कारण शरीर मे कुल ऊष्मा बढ़ जाती है जिसका निष्काषन होना आवश्यक है ऐसी स्थिति मे त्वचा पर उपस्थित पसीने की ग्रंथियों से पसीना निकलता है और वाष्पोत्सर्जन की क्रिया के फलस्वरूप त्वचा पर ठण्डक पैदा होती है (जिस सतह पर वाष्पोत्सर्जन की क्रिया होती है उस सतह का तापमान कम हो जाता है When animals sweat, heat is in that sweat, which evaporates, taking the heat away from the animal, therefore cooling it) और शरीर  की अतिरिक्त ऊष्मा कम हो जाती है व शरीर ठंडा हो जाता है 
 परन्तु कुत्तों के शरीर मे इन स्वेद ग्रन्थियों  की कमी होती है ऐसी स्तिथि मे कुत्ता नाक से सांस ले कर मुहँ से बाहर निकालता जाता है जिस कारण जीभ पर लार के वाष्पोत्सर्जन की दर तेज हो जाती है और जीभ तेज़ी से ठण्डी होती है जो जीभ से गुजर रहे  खून को ठण्डा करती है जिस से कुत्ते को शीतलता प्राप्त होती है 
इसी कमी यानी कि पसीना कम आने के कारण कुत्ते गर्मियों मे नाली  या पानी मे लेटे रहते है जिसे उनके बाल गीले हो जाते है और वाष्पोत्सर्जन की क्रिया तेज हो जाती है 
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मंगलवार, 21 सितंबर 2010

हमें आकाश नीला क्यूँ दिखाई पड़ता है ? Why is the sky blue?

हमें आकाश नीला क्यूँ दिखाई पड़ता है? 
पृथ्वी की सतह (जमीन) से ऊपर वायुमंडल है  वायुमंडल मे विभिन्न गैसे है धूलकण और जलवाष्प भी है और सूर्य का प्रकाश सात रंगों से मिल कर बना है  इन सात रंगों को बैनीपीनाला VIBGYOR लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला, तथा बैंगनी के नाम से याद रख सकते है |   
वायुमंडल  ज्यादातर गैसों (78%) नाइट्रोजन, और ऑक्सीजन (21%) से मिल कर बना है.इसके अलावा  आर्गन गैस और भाप (बूंदों और बर्फ के क्रिस्टल) के रूप में पानी उपलब्ध है  इनके अलावा  अन्य गैसों की थोड़ी मात्रा,  धूल कण , काजल और राख, परागकण , महासागरों से  नमक की तरह कई छोटे ठोस कण भी वायुमंडल मे उपस्थित है 
जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल मे प्रवेश करता है तो वह इन सब से टकराता है और चारों और बिखर Scattering of Light जाता है  
      बिखरने वाले रंगों मे बैंगनी,आसमानी रंग,नीला सबसे ज्यादा Scatter बिखरते है और लाल रंग सब से कम बिखरता है ऐसा Rayleigh scattering  रेले स्केट्रिंग के कारण होता है यही तीनों रंग हमारी आँखों तक सब से ज्यादा पहुँचते है इन तीनो रंगों का मिश्रण नीले रंग के सदृश्य बनता है 


पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर यानि अंतरिक्ष मे आकाश दिखता है नीले रंग के बजाय काला और घुप्प अँधेरा,यह इसलिए है क्योंकि वहाँ कोई वायुमंडल नहीं है है. कोई बिखरा हुआ  प्रकाश नहीं है जो हमारी आँखों तक पहुंचे |      
नोट :- सुझावों का स्वागत है 
सुझवों और लेख मे सुधारों को लेख मे शामिल कर लिया जाएगा |

इस ब्लॉग की आवश्यकता क्यों पड़ी ?


'क्यों और कैसे विज्ञान मे' ब्लॉग बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी यह मेरे सहकर्मी मुकेश रोहिल के कहने पर बनाया जा रहा है |
मुकेश ने कहा की कोई ऐसा ब्लॉग बनाओ जहां बच्चो और बड़ों सब को विज्ञान की छोटी से छोटी  जिज्ञासाओं का हल मिल सके और छोटे बड़े सब प्रश्नों का उत्तर मिल सके |
तो फिर आ गया ये ब्लॉग जहाँ मिलेगा आपको क्यों और कैसे का जवाब वो भी विशेषज्ञ टिप्पणियों  के साथ |